Wazu ke Faraiz क्या है और कितने होते है

वजू करते वक़्त अगर कोई Wazu ke Faraiz को पूरा नहीं करता है तो उसका वजू दुरुस्त नहीं मना जाता है उसको चाहिए की सबसे पहले Wazu ke Farz अदा करे।

दोस्तों आज की पोस्ट में यही सिखने को मिलने वाला है की वजू में कितने चीज़े फ़र्ज़ है जिसको पूरा करना बेहद जरुरी है जिसके बिना वजू गलत हो जायेगा।

अगर किसी सख्स को Wazu karne ka Tarika नहीं आता है और वह शख्स इस पोस्ट को पढ़ रहा है तो उसको चाहिए की पहले इसका तरीका सीखे।

दोस्तों इस्लाम में हर एक काम का फ़र्ज़, सुन्नत और नफिल होता है ठीक उसी तरह वजू का भी फ़र्ज़ होता है और Wazu ki Sunnat और Wazu ke Mustahab होते है इसको भी सीखना बेहद जरुरी है।

दोस्तों आप सभी के गुजारिश है की इस पोस्ट को धयान और इत्मिनान से पढ़े और आखिर तक जरुर पढ़े जिससे आपको आसानी से समझ आ सके।

फ़र्ज़ किसे कहते है?

वह काम जिसको करने का अल्लाह ता’अला और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने ताकीद के साथ हुक्म दिया हो, जिसका करना जरुरी हो और उसको छोड़ना सख्त गुनाह हो और उस काम को इंकार करने वाला काफ़िर हो जाता है।

इसी तरह बगैर किसी वजह से फ़र्ज़ छोड़ देने वाला सख्त अजाब का मुस्तहब होता है जैसे:- दिन भर में पांच वक़्त की नमाज़ हम सभी मुस्लमान पर फ़र्ज़ किया गया है जिसको जानबूझ कर छोड़ देना सख्त गुनाह और अजाब का हक़दार होगा और इंकार करने से काफ़िर हो जाता है।

Wazu ke Faraiz Kitne Hai

जिस तरह से Namaz ke Faraiz अरकान को पूरा नहीं करने पर नमाज़ कबूल नहीं होता उसी तरह वजू में फ़र्ज़ अरकान को पूरा नहीं करने पर वजू दुरुस्त और कबूल नहीं होती।

Wazu ke 4 Faraiz Hote Hai जिसमे से अगर एक भी फ़र्ज़ रह गया तो वजू सही से नहीं हुआ और इसके बगैर नमाज़ भी नहीं हो सकता है. जिसके बारे में ऊपर आपने समझ लिया की क्यों जरुरी है अब जानते है की वह चार फ़र्ज़ कौन कौन सी है।

  1. पूरा चेहरा धोना
  2. दोनों हाथ कोहनियों समेत धोना
  3. सर का मसह करना
  4. दोनों पैरो को तखनो समेत धोना

दोस्तों वजू करते वक़्त इन चार चीजों को सही से करने पर फ़र्ज़ अरकान पूरा हो जाता है अब इसको पूरी डिटेल्स और जानकारी के साथ समझे।

चेहरा धोना

Wazu ke Faraiz का पहला फ़र्ज़ चेहरा धोने का मतलब है की एक कान की लॉ से दुसरे कान की लॉ तक और सर की बाल जहाँ से शुरू होता है वहा से ठोड़ी तक यानि जहाँ से गला शुरू होता है वहा तक हर हिस्सा पर एक बार  पानी बहाना फ़र्ज़ है।

जिस शख्स के सर का बाल गिर गया हो या जमे नहीं हो तो उस पर वही तक धोना फ़र्ज़ है जहाँ तक अक्सर बाल होते है।

दोनों हाथ कोहनियों समेत धोना

दोनों हाथो को कोहनियों समेत धोना यानि कोहनियों को सामिल करके धोना फ़र्ज़ है अगर कुहनीयों से नाख़ुन तक कोई जगह ज़र्रा बराबर भी धुलने से रह जाएगी तो वुज़ू नहीं होगा।

कुछ लोग को देखते है की जल्दी जल्दी के चक्कर में कोहनियों को अच्छी तरह से नहीं धुल पाते और कुछ जगह धुलने से बाकि रह जाता है इसी तरह से नमाज़ पढ़ने लग जाते है लेकिन ये तरीका गलत है।

पुरे सर का मसह करना

दोनों हाथो में चुल्लू भर पानी लेकर पुरे सर का मसह करना यानि सर का जहाँ से बाल शुरू होता है यानि पेशानी से शुरू करना है और पीछे जहाँ बाल ख़त्म होता है वहां तक दोनों हाथो को लेकर जाना है फिर उसी हाथो को आगे पेशानी के तरफ लौटाए।

पीछे से दोनों हाथो को लौटना हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम की सुन्नत है और इसी तरह से करना चाहिए।

दोनों पैरो को तखनो समेत धोना

दोनों पैर के तखनो समेत धोना है यानि हर पैर के उगुलिया में पानी जाना चाहिए कोई भी हिस्सा बाकि न रहने पाए लेकिन कुछ इसमें एक गलती करता है की पैर के पीछे के हिस्सों को धुलने में भूल जाते है और उनको कभी कभी मालूम भी नहीं चलता है।

आज क्या सीखा

दोस्तों आज की पोस्ट में Wazu ke Faraiz के बारे में सिखा और समझा की Wazu ke kitne Farz होते है जिसके बगैर आपकी वजू दुरुस्त नहीं होगी।

वजू करने वक़्त ये ध्यान जरुर दे की तरतीब के साथ धोए यानि जिस तरह से कुरान व हदीस में बताया गया है उसी नंबर में धोना है।

ऐसा न हो की पहले हाथ धो ले फिर कुल्ली करे और पैर धोने के बाद चेहरा धोए इस तरह से करने पर आपकी वजू नहीं होगी क्युकी तरतीब से करना फ़र्ज़ है।

दोस्तों मुझे उम्मीद है की आप सभी को ये पोस्ट अच्छा लगा होगा इसी तरह का इस्लामिक जानकारी लेने के लिए इस पोस्ट को अपने सोशल मीडिया पर शेयर करे।

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