Taraweeh ki Dua: रमजान में तराबी की दुआ याद करे

Taraweeh ki Dua in Arabic, Hindi, English

अस्सलामु अलैकुम नाज़रीन क्या आप भी Taraweeh ki Dua सीखना चाहते है। जिसके लिए गूगल और Youtube पर सर्च करके यहाँ तक पहुंचे है, तो मेरी जिम्मेदारी है की तरावीह की दुआ से मुताल्लिक सभी सवालो का जवाब यहाँ पर मिल जाए।

दोस्तों मै एक बात से आगाह कर देना चाहता हूँ की इस्लामिक जानकारी किसी ऑथेंटिक जरिया से ही जानकारी लेना चाहिए। क्युकी आज के समय में कोई भी इस्लामिक मसला हो इसको न्यूज़ वेबसाइट जरुर लिखते है चाहे वह गलत क्यों ना लिखे।

इसीलिए आप ऐसे वेबसाइट से जानकारी लेना चाहिए जो सिर्फ इस्लाम के मुताल्लिक आर्टिकल लिखता हो।

आज से तरावीह की नमाज़ इंडिया के सभी मस्जिद में शुरू हो जायेगा। लेकिन इसका वक़्त सिटीज के अनुसार अलग अलग होगा। यह तराबी ईशा के वक़्त में भी पढ़ लिया जाता है।

नाज़रीन अब इस दुआ को सीखने की ओर चलते है जिसमे आप सभी को सीखने के लिए अलग अलग भाषा लिखा गया है।

तरावीह की दुआ क्या है?

Tarabi ki Dua क्या है? इससे जानने से पहले यह जान लेते है की तराबी एक अरबी भाषा का शब्द है जिसका मतलब होता है आराम और ठहरना। यह दुआ Taraweeh ki Namaz में हर चार रकात के बाद जलसा की सूरत में बैठ कर पढ़ा जाता है।

तरावीह की दुआ कब पढ़ा जाता है?

ईशा की नमाज़ के बाद जब तरावीह की नमाज़ शुरू हो जाता है तो इसके बिच में रुक कर यह दुआ पढ़ा जाता है। यानि तरावी की नमाज़ 2 – 2 रकात करके पढ़ा जाता है और जब चार रकात पुरे हो जाता है तो सलाम फेरने के बाद उसी सूरत में बैठ कर यह दुआ पढ़ा जाता है।

Taraweeh ki Dua

जिस तरह से रमज़ान में रोज़ा रखने की दुआ पढ़ना जरूरी है। उसी तरह तरावीह की दुआ पढ़ना भी लाज़िमी है। रमजान के महीने में तरावीह के बहुत अहमियत और फ़ज़ीलत हैं और अगर बिना दुआ के तराबी नमाज़ पढ़ी जाती है, तो तरावीह का सवाब कम मिलता है।

यहाँ पर तिन अलग भाषा में इस दुआ को लिखा गया है जिसकी माध्यम से अगर एक भाषा का उच्चरण सही से नहीं हो पा रहा है तो दूसरी और तीसरी भाषा की मदद से सही उच्चारण को सीख सकते है।

इसीलिए आप इस वेबसाइट को पहले से जान रहे है तो इस वेबसाइट पर किसी भी दुआ को 2 से ज्यादा भाषा में लिखा जाता है।

क्युकी इस वेबसाइट पर आने वाले लोगो को बहुत ही कम अरबिक आता है। अगर आता भी है तो सही से उच्चारण नहीं कर पाते उनके लिए ही 2 से अधिक language का इस्तेमाल करता हूँ।

Taraweeh ki Dua in Arabic

तरावीह की दुआ हिंदी में जाने

  • सुब्हा-नल मलिकिल क़ुद्दूस
  • सुब्हा-न ज़िल मुल्कि वल म-ल कूत
  • सुब्हा-न ज़िल इज्जती वल अ-ज़-मति वल-हैबति वल क़ुदरति वल-किब्रियाइ वल-ज-ब-रुत 
  • सुब्हा-नल  मलिकिल हैय्यिल्लज़ी ला यनामु व ला यमूत
  • सुब्बुहुन कुद्दूसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइकति वर्रूह
  • अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन्नारि
  • या मुजीरु या मुजीरु या मुजीर

Taraweeh Ki Dua in Roman English

  • Subhanal Malikil Quddus
  • Subhana jil Mulki wal Malakuti
  • Subhana jil izzati wal ajhmati wal haybati wal Qudrati wal kibriyaa’i wal jabaroot
  • Subhanal Malikil hayyil lajhi, la yunaamu wa layamutu
  • Subbuhun, Quddusun, Rabbuna w Rabbul malaa’ikati war-rooh
  • Allahumma Ajirnee Minan Naar
  • Ya Mujeero, Ya Mujeero, Ya Mujeer।

Taraweeh ki Dua with Meaning

पाक है वो अल्लाह जो मुल्क और बादशाहत वाला है। पाक है वो अल्लाह जो इज्ज़त वाला, और अज़मत वाला, और हैबत वाला, और कुदरत वाला, और बड़ाई वाला, और सतवत वाला है। पाक है वो अल्लाह जो बादशाह है, जिंदा रहने वाला है, के ना उसके लिए नींद है और ना मौत है, वो बे इन्तेहा पाक है, और बेइंतेहा मुक़द्दस है, हमारा परवरदिगार फरिश्तों और रूह का परवरदिगार है। ए अल्लाह जहन्नम की आग से हमें बचाना। ऐ बचाने वाले, ऐ पनाह देने वाले, ऐ निजात देने वाले।

तरावीह की दुआ कब पढ़ी जाती है?

यह दुआ उस वक़्त पढ़ा जाता है जब चार रकात मुकम्मल हो जाने के बाद यानि चार रकात के आखिर रकात में सलाम फेरने के बाद उसी हालत में तरावीह की दुआ पढ़ लिया जाता है।

तरावीह का मतलब क्या होता है?

तराबी का मतलब यह होता है की किसी चीज़ के बाद आराम या ठहरना होता है।

क्या तरावीह की दुआ 2 रकअत के बाद भी पढ़ सकते हैं?

बिलकुल नहीं, Taraweeh ki Dua सिर्फ चार रकात के बाद ही पढ़ा जाता है। और 2 रकात पे पढ़ना मना किया गया है।

क्या तरावीह की दुआ अरबिक में पढ़ना जरुरी है?

हाँ बिलकुल, यह दुआ अरबिक में पढ़ना बहुत जरुरी है और सिर्फ यही दुआ नहीं बलके कुरान की किसी भी आयत या दुआ को अरबिक भाषा में ही पढ़ना जरुरी है। इसका कारण यह है की अरबिक में पढ़ने से इसका उच्चारण सही और सटीक होता है कोई भी ज़बर ज़ेर, पेश की गलती नहीं होता है।

अगर तरावीह की दुआ अरबिक में याद ना हो तो?

अगर किसी शख्स को यह दुआ अरबी भाषा में याद नहीं है तो किसी और भाषा में पढ़ सकता है लेकिन ध्यान से की उच्चारण सही से होना चाहिए। क्युकी जानबूझ कर गलती करने से गुनाह होता है।

तराबी की दुआ याद नहीं है तो क्या करे?

अगर किसी सख्स को Taraweeh ki Dua याद नहीं है लेकिन अरबिक पढ़ने आता है तो उसको चाहिए की मोबाइल फ़ोन साथ में रखे और जब यह दुआ पढ़ने का वक़्त आए तो मोबाइल फ़ोन ओपन करके पढ़ने लगे।

इसके लिए आपको पहले इस वेबसाइट को बुकमार्क कर ले या जब नमाज़ पढ़ने लगे तो इसी ब्लॉग को चालू करके छोड़ दे। और फिर जब भी चार रकात के बाद पढ़ने का वक़्त आए तो सिम्पली फ़ोन को चालू करके पढ़ने लगे।

आज क्या सीखा?

नाज़रीन मुझे बहुत उम्मीद है की आप सभी हज़रात को Taraweeh ki Dua याद हो गया होगा। जिसमे अरबिक, हिंदी और रोमन इंग्लिश के साथ इसके तर्जुमा और मतलब को सीखा।

जिसकी वजह से आपको यह भी मालूम हो गया होगा की जो अरबिक आयत है वह क्या कहना चाह रहा है। जिसे जब यह दुआ पढेंगे तो आपके जेहन भी इसकी मतलब भी याद होते रहेगा।

इस दुआ के मुताल्लिक किसी भी प्रकार का कोई भी सवाल हो जो यहाँ पर बताया नहीं गया है तो निचे कमेंट में जरुर बताये।

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