Sajda Sahw ka Tarika | सजदा साहव के 5 तरीके

Sajda Sahw Karne ka Tarika Kya hai

आप से नमाज़ पढ़ने में गलती हो जाता है तो आप क्या करते है नमाज़ दोबारा पढ़ते है या Sajda Sahw करते है.

अगर नमाज़ में गलती हो जाने के बाद दुबारा पढ़ते है तो आज की यह पोस्ट आपको बहुत ज्यादा मदद करेगा.

क्युकी हर सख्स का नमाज़ में अलग अलग गलती करता है और इस तरह से गलती में आपको Sajda Sahw ka Tarika मालूम होना चाहिए.

लेकिन कुछ ऐसे भी जगह होते है जहाँ अगर गलती हो जाए तो नमाज़ को फिर से पढ़ना चाहिए नहीं तो नमाज़ ही नहीं होगा.

कभी कभी तो Sajda e Sahu वाजिब हो जाता है लेकिन बहुत से लोगो को मालूम भी नहीं चलता इसी लिए आज मैंने यह पोस्ट लिखा हूँ.

Sahw क्या है?

Sahw एक अरबिक शब्द है जिसका मतलब होता है भूलना या भूल जाना, यानि जो काम कर रहे है उसे भूल कर कोई दूसरा कम करने लगे उसे Sahw कहते है.

Sajda Sahw क्या है?

नमाज़ में कोई वाजिब में कुछ भूल कर पहले या बाद में पढ़ने लगे और उस नमाज़ में कमी आने लगे तो इसी कमी को पूरा करने के लिए आखिरी रकात में तशाहुद के बाद 2 सजदा करते है उसी को Sajda Sahw कहते है.

मसलन कोई सख्स फजर की 2 रकात फ़र्ज़ की नमाज़ पढ़ रहा है और पहली रकात में सुरह फातिहा पढ़ने के बाद भूल सजदा में चले जाता है और एक सजदा करने के बाद याद आता है तो उसको चाहिए को नमाज़ को फिर वैसे ही पढ़े लेकिन आखिर में सजदा साहव कर ले.

सजदा साहू यकीन पर किया जाता है यानि अगर आपको तिन या चार रकात में समझ नहीं आ रहा है की कितना रकात पढ़ा है तो आपको 3 पर तो यकीन है चार में प्रॉब्लम है तो एक रकात और पढ़ ले.

फिर आखिर में सजदा साहू कर ले और इसी तरह अगर चौथा रकात नहीं पढ़ा और तीसरी रकात पर सलाम फेर दिया तो सजदा साहू करने से नमाज़ दुरुस्त नहीं होगा फिर से नमाज़ पढ़ होगा.

सजदा साहू क्यों जरुरी है

सजदा साहव इस लिए जरुरी है की जब कोई सख्स नमाज़ पढ़ता तो उसको तरह तरह का ख्याल आता है इस चक्कर में वह इन्सान भूल जाता है कभी कभी तो बुरे ख्याल आते रहते है और ये सब सैतान की तरह से होता है.

सैतान चाहता है आप नमाज़ में गलती करे इसीलिए वह आपके दिमाग में तरह तरह के ख्याल लाता रहता है इस तरह से आपकी नमाज़ ख़राब हो जाता है जिसको दुरुस्त यानि ठीक करने के लिए हदीस में सजदा साहव करने का हुक्म आया है.

Sajda Sahw Kab Wajib hota Hai

सजदा साहू वाजिब होने की कुछ सर्त है जो निचे बताया जा रहा है जिनमे से अगर कोई एक वाजिब सर्त में आप से छुट जाए तो आप पर सजदा साहू वाजिब हो जाता है.

  • कोई भी नमाज़ का तरीका में किसी अमल को सही से पहले या उससे बाद में पढ़ लेना यानि किसी भी रकात में सुरह फातिहा यानि अलहम्दो के बाद बिना कोई सुरह पढ़े रुकू में चले जाना या अलहम्दो से पहले रुकू में चले जाना.
  • किसी नमाज़ में फ़र्ज़ या वाजिब में कोई अमल को दो बार कर लेना मसलन रुकू या सजदे दो बार की जगह 3 या 4 बार कर लेना.
  • फ़र्ज़ या वाजिब नमाज़ में किसी अमल को उसकी जगह से बाद में पढ़ना यानि पहली रकात का एक सजदा भूल गया और दूसरी या तीसरी रकात में याद आया तो 3 सजदा कर लिया, या फिर सुरह फातिहा से पहले सूरत पढ़ लिया.
  • नमाज़ में कोई वाजिब अमल को छोड़ दिया मसलन तशाहुद नहीं पढ़ा या सुरह फातिहा नहीं पढ़ा, या फिर अलहम्दो के बाद सूरत नहीं मिलाया.
  • किसी वाजिब नमाज़ की कंडीशन को चेंज कर दिया यानि फजर, मग़रिब और ईशा की नमाज़ को इमाम अहिस्ता पढ़ लिया और जोहर और असर की नमाज़ को इमाम जोर यानि बुलंद आवाज़ से पढ़ लिया.
  • सजदा साहू जरुरी हो जाता है जब Witr ki Namaz में दुआ ए क़ुनूत पढ़ना भूल जाए.
  • किसी ने दरमियान में तशाहुद नहीं पढ़ा और तीसरी रकात में याद आया तो आखिर में सजदा ए साहू कर ले.

रसूल अल्लाह सल्लाहू अलैहे वसल्लम से फ़रमाया की अगर तुम से किसी को रकात की तादाद पर सक हो जाए की 3 पढ़ी है 4? तो उसे सक को छोड़ कर यकीन पर एतेमाद करे.

और इसका यकीन 3 रकात पर था चार पे नहीं इसी लिए एक और रकात पढ़ना चाहिए लेकिन उसने चौथा रकात नहीं पढ़ा और आखिर में सजदा साहव कर लिए तो उसका नमाज़ नहीं होगा.

इसके अलावा नमाज़ में जितने भी वाजिबात है जिसको पूरा करना बहुत जरुरी है जिसको पढ़ने के लिए Namaz ke Wajibat वाली पोस्ट को जरुर पढ़े.

Sajda Sahw ka Tarika मुकम्मल क्या है

Sajda Sahw karne ka Mukammal Tarika

दोस्तों सजदा साहव के बारे में तो अब आपको बहुत सी जानकारी हो गया है जैसे सजदा साहव वाजिब है? सजदा साहव क्यों वाजिब है ऐसे ही बहुत सारे जानकारी.

अब जानते है की Sajda Sahw ka Sunnat Tarika क्या है जो हदीस शरीफ में लिखा हुआ है लेकिन अगर किसी को सजदा साहव करने का तरीका मालूम होगा भी तो एक ही तरीका मालूम होगा.

मैंने आपको हदीस की रोशिनी में 4 तरीके बताऊंगा जिसको सिख कर आप भी आसानी से अपने नमाज़ को दुरुस्त कर सके.

Sajda Sahw Karne ka Pahla Tarika

पहला तरीका है यह है की जब आपको सक हो की कुछ वाजिबात चीज़े छुट गया है तो आखिरी रकात में बैठ कर तशाहुद पढ़े और सलाम फेरने से तुरंत पहले दो सजदा करे और जब दोनों सजदा करके बैठ जाए तो फ़ौरन सलाम फेर दे.

यह तरीका आपको Sahih Muslim Hadees No 1269 में मिल जाएगा किसी को पढ़ना है तो वह पढ़ सकता है.

सजदा साहव करने का दूसरा तरीका

दूसरा तरीका यह है की कोई भी नमाज़ पढ़ रहे है और सक हो जाए या नमाज़ ख़त्म होने के बाद याद आए तो यह तरीका अपना सकते है.

नमाज़ के आखिरी रकात यानि 2 रकात पढ़ रहे है तो 2 रकात या 4 रकात पढ़ रहे है तो चौथी रकात वैसे ही बाकि नमाजो की रकात होगी वैसे नमाज़ की रकात के बारे में जानकारी नहीं है तो आपको Namaz ki Rakat वाली पोस्ट को पढ़ना चाहिए.

तरीका यह है की आखिरी रकत में सलाम फेर दे जैसे आम तौर पर किया जाता है फिर 2 सजदा कर ले लेकिन इसके बाद सलाम फेरने की जरुरी नहीं है. इस तरीके से भी सजदा साहू हो जायेगा और यह Sahih Bukhari Hadees No 401 में बताया गया है.

Sajda Sahu Karne ka Teesra Tarika

इसमें सजदा साहव करने का तरीका यह रहेगा की नमाज़ के आखिरी रकात में तशाहुद पढ़ कर सलाम फेर दे फिर दो सजदा करे यानि सजदा साहव करे.

लेकिन यहाँ पर धयान देने वाला बात यह है की इसमें दोनों सजदा करने के बाद फिर सलाम फेर लेना है.

यह तरीका Sahih Muslim Hadees No 1274 में आया है अगर किसी को सक हो की यह जानकारी गलत है तो वह अपने मुताक्बिक खोज कर ले.

सजदा साहव करने का चौथा तरीका

चौथा तरीका सबसे अलग है जिसको धयान से समझाना होगा और तरीका यह है की आखिर रकात में बैठ कर पूरा तशाहुद पढ़े और सलाम फेरने से तुरंत पहले 2 सजदा करे और फिर पूरा तशाहुद पढ़े और आखिर में दाहिने और बाये जानिब सलाम फेर दे.

अगर आपको यह तरीका समझ में नहीं आया तो कमेंट करे या इससे समझने के लिए Jamia Tirmazi Hadees No 395 को पढ़ सकते है.

Sajdah Sahw ka Panchwa Tarika

पांचवा तरीका फीका हनफी में बहुत मसहुर है जो तरीका यह है की आखिर रकात में तशाहुद पढ़े फिर दाये जानिब सलाम फिर 2 सजदा करे जैसे नमाजो में करते है. फिर तशाहुद पढ़े और दाये और बाये जानिब सलाम फेर ले.

इस तरह से आपकी सजदा साहव का तरीका मुकम्मल हो गया इन पांचो तरीका में से कोई भी तरीका से सजदा साहू करते है तो आपकी नमाज़ दुरुस्त हो जाएगी.

Sajda Sahw Kab Tak Kar Sakta Hai?

सजदा साहू का करने का कोई आखिरी वक़्त नहीं है जब आपको याद आए ऊपर बताए गए तरीके से कर सकते है. बलके हदीश में आया है की एक बार हुजुर सल्लाहू अलैहे वसल्लम से जोहर चार फ़र्ज़ नमाज़ में 2 रकात पढ़ कर सलाम फेर दिए और मस्जिद से बाहर निकले तो एक सहाबा ने बोला की आपने से जोहर की सिर्फ 2 रकात फ़र्ज़ पढाया है.

आप ने सब पूछा तो सभी ने कहा की तो फिर से आप 2 रकात जोहर की नमाज़ अदा किये और आखिर में सजदा साहव कर लिए.

वैसे की अगर आप सुन्नत नफिल नमाज़ पढ़ लिया और आपको याद आया की इमाम के पीछे एक रकात बचा हुआ है तो आप उस वक़्त पढ़ कर आखिर में सजदा साहू कर ले.

Sajda Sahw Related Questions (FAQs)

अगर नमाज़ में फ़र्ज़ अमल छुट जाए तो क्या होगा?

अगर किसी सख्स से नमाज़ में फ़र्ज़ अमल छुट जाए जैसे: कयाम, कीरत, रुकू, सजदा और इसके अलावा जिसने में नमाज़ में फ़र्ज़ अमल है जिसके बगैर नमाज़ होगी ही नहीं तो उस सूरत में सजदा साहू करने से भी नमाज़ दुरुस्त नहीं होगा उसके लिए आपको दोबारा पढ़ना होगा.

फ़र्ज़ और सुन्नत के छुट जाने से सजदा सहु वाजिब होता है या नहीं

अगर किसी सख्स से फ़र्ज़ छुट जाने से नमाज़ फासिद हो जाती है सजदा सहु से नमाज़ दुरुस्त नहीं हो सकता लिहाजा फिर से पढना पड़ेगा औए सुन्नत व मुस्तहब मस्ला ताउज, तस्मिया, सना, आमीन और तक्बिरात के छुट जाने से सजदा सहु वाजिब नहीं होता है बलके नमाज़ हो जाती है.

किन बातो से सजदा साहू वाजिब होता है

जो अमल नमाज़ में वाजिब है इन में से किसी एक को भूल कर छुट जाने से सजदा सहु वाजिब होता है जैसे: फ़र्ज़ की पहली या दूसरी रकात में अलहम्दो या सूरत पढ़ना भूल गया या अलहम्दो से पहले सूरत पढ़ दे तो इन सूरतो में सिज्दा सहु करना वाजिब होता है.

किसी ने सजदा साहव नहीं किया और फिर से नमाज़ पढ़ लिया

अगर किसी सख्स पर सजदा साहव वाजिब है और उस सख्स ने Sajda Sahw नहीं किया फिर से नमाज़ पढ़ लिया तो कोई हर्ज़ नहीं उसकी नमाज़ हो जाएगी.

सजदा साहू सिर्फ फ़र्ज़ नमाज़ में करे या सुन्नत और नफिल में

सजदा साहू करने के लिए फ़र्ज़ नमाज़ या सुन्नत या नफिल नहीं देखा जाता है बलके किसी भी नमाज़ में जो वाजिब अमल है वह भूल जाए तो सजदा साहू करना वाजिब हो जाता है.

आज आपने क्या सिखा

आज आपने Sajda Sahw करने का 5 तरीके के बारे में सिखा जिसमे से किसी सख्स ने एक तरीके से भी कर लिया तो उसकी सजदा साहू हो जायेगा.

लेकिन आपको एक बात का बहुत धयान देना होगा सजदा साहू सिर्फ वाजिब अमल के लिए होता है जो ऊपर पूरी जानकारी से साथ बताया गया है लेकिन फ़र्ज़ अमल किसी से छुट जाए तो उसको फिर से नमाज़ पढ़ना होगा.

मुझे उम्मीद है की Sajdah Sahw karne ka Tarika आपको बहुत अच्छा लगा होगा और इसी तरह आपको कुछ और सलवा है जो मैंने इस पोस्ट में बताया नहीं तो निचे कमेंट में बताए.

अगर आपको ये जानकारी अच्छा लगा होगा तो इस पोस्ट को अपने सोशल मीडिया फेसबुक, व्हात्सप्प, इन्स्ताग्राम में शेयर जरुर करे.

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