Istikhara ki Namaz Padhne ka Tarika Kaise Sikhe

कोई सख्स को फैसला लेने में परेशानी आ रहा या किसी काम में फसे हुए है और कुछ समझ नहीं आ रहा है तो उसे चाहिए की Istikhara ki Namaz पढ़ना चाहिए.

बुखारी शरीफ की रिवायत है की नबी सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने फ़रमाया “किसी भी नेक और जायज़ काम करने से पहले फ़र्ज़ नमाज़ के अलावा दो रकात नमाज़ और Istikhara ki Dua पढ़ा करो”.

आज की पोस्ट में आपको Istikhara ki Dua, Istikhara ki Niyat Rakat Tarika सीखना को मिलेगा इसके अलावा इसके मुताल्लिक सवालो का जवाब मिलेगा.

इस्तिखारा क्या है?

इस्तिखारा का मतलब अल्लाह ता’अला से खैर तलब करना, यानि अपनी किसी मुश्किल काम या शादी में अल्लाह से खैर और भलाई की दुआ मांगना की अल्लाह ये मेरा काम ठीक ठीक से हो जाए.

इस्तिखारा कब करना चाहिए?

जब कोई सख्स बहुत अहम् काम करने का इरादा करता है जैसे किसी अनजान जगह बिज़नस शुरू करना, शादी विवाह करना, किसी अनजान जगह जाना पर कारोबार शुरू करना आदि लेकिन दिल में बार बार ख्याल आ रहा है की ये मेरे लिए बेहतर या नहीं तो उस वक़्त आपको चाहिए इस्तिखारा करे.

Istikhara ki Namaz ka Time

इस्तिखारा एक नफिल इबादत और नमाज़ है इसके लिए कोई भी वक़्त मुकरर नहीं आपके पास जब समय तब पढ़ सकते है.

आपको मकरूह वक़्त का धयान देना चाहिए क्युकी इस वक़्त कोई भी नमाज़ पढ़ने से मना किया गया है आप रात और दिन में जब समय मिले मकरूह वक़्त के अलावा तब इस्तिखारा किया जा सकता है.

Istikhara ki Namaz ki Niyat Kaise Bane

नियत की मैंने 2 रकात नमाज़ नफिल इस्तिखारा की वास्ते अल्लाह तआला के मुंह मेरा काबा शरीफ की तरफ अल्लाहु अकबर

Istikhara ki Namaz ki Rakat

इस्तिखारा की नमाज़ 2 रकात पढ़ी जाती है जिसका तरीका निचे बताया गया है और ये नमाज़ भी एक नफिल नमाज़ है जो फ़र्ज़ नहीं है.

Istikhara ki Namaz Padhne ka Tarika Bataye

दोस्तों आप सभी को इस नमाज़ को पढने से पहले इसके बारे में जानकारी लेना जरुरी है यानि आपको मालूम होना चाहिए की यह नमाज़ कब और कब नहीं पढ़ सकते है और इसके नियत व रकात क्या है इसके बारे में उपर विस्तार से बताया गया है.

कोई भी नमाज़ पढ़ने के लिए दिल में पक्का यकीन होना चाहिए तभी जाकर हो नमाज़ आपके लिए ज्यादा फ़ज़ीलत और फायदे पहुंचाते है.

इसी तरह आपको ये भी मालूम होना चाहिए की अलग अलग नमाज़ पढ़ने का अलग फ़ज़ीलत और फायदा होता है जिससे जानने के लिए Namaz ki Fazilat वाली पोस्ट को पढ़ना चाहिए.

Istikhara ki Namaz एक नफिल नमाज़ है और इसका तरीका कोई खास तरीका नहीं बलके आप पांच वक़्त यानि फजर से ईशा तक की नमाज़ जैसे पढ़ते है उसी तरह ये भी पढ़ा जाता है.

आपको ये भी जानकारी होना चाहिए की कोई भी इबादत करने के लिए वजू का होना बहुत फ़ज़ीलत वाली चीज़ है और जब नमाज़ की बात आती है तो नमाज़ के लिए वजू होना सर्त है तभी मुकम्मल नमाज़ होगी.

Istikhara Namaz ki Pahli Rakat

सबसे पहले वजू करे आप चाहे तो मस्जिद या घर पर पढ़ सकते है इसके लिए जमात जरुरी नहीं है इस लिए बेहतर है की घर पर ही पढ़े।

इस्तिखारा की नियत करे जो ऊपर बताया गया है नियत करने के बाद दोनों हाथो को ऊपर उठाय और बांध ले फिर सना और आउज़ बिल्लाहे मिन्नस सैतानिर्रजिम और बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम पढ़े।

इसके बाद सुरह फातिहा और कुरान को कोई सूरत मिलाए और अल्लाहु अकबर कहते हुए रुकू में जाए और रुकू में तिन बार सुबहाना रब्बियल अज़ीम कहे समिल्लाहु लिमन हमीदा कहते हुए खड़े हो जाये फिर खड़े रहते हुए ही रब्बना लकल हम्द कहे।

अल्लाहु अकबर कहते हुए सजदा में जाए और दोनों सजदा में तिन बार सुब्हान रब्बि यल आला कहे और दूसरी रकात के लिए खड़ा हो जाए।

Istikhara Namaz ki Dusri Rakat

दूसरी रकात में आप सिर्फ अलहम्दो शरीफ और सूरत मिलाए फिर रुकू और सजदा करे जैसे पहली रकात में बताया गया है इसी तरह दूसरी सजदा करने के बाद अपने दोनों पंजो पर बैठ जाए।

यहाँ पर आपको धयान देना होगा की आप नार्मल नमाजो की तरह अत्तहीयात, दरूद ए इब्राहिम और दुआ ए मासुरा पढेंगे लेकिन इसके बाद सलाम नहीं फेरना है बल्कि Istikhara ki Dua पढ़ना है जो निचे बताया गया है।

Istikhara ki Dua पढने के बाद अस्सलामो अलैकुम वरहमतुल्लाह पहले दाएं जानिब मुंह फेरे फिर अस्सलामो अलैकुम वरहमतुल्लाह बाएं जानिब मुंह फेरें।

इस तरह से आपकी Istikhara ki Namaz मुकम्मल हो गया इसके बाद दोनों हाथो को अल्लाह के बारगाह में उठाय और दुआ मांगे इंशाअल्लाह आपकी प्रॉब्लम खत्म हो जाएगी।

Istikhara ki Namaz ki Dua Padhne ka Tarika

दोस्तों Istikhara ki Dua एक बहुत लम्बी दुआ है जिसको याद करना आज के नौजवानों के लिए मुश्किल होता है क्युकी वह हाफिज नहीं होते है ऐसे में उन्हें क्या करना चाहिए।

अगर कोई सख्स को इस्तिखारा की दुआ याद नहीं है तो उसे चाहिए की नमाज़ में इस्तिखादा दुआ न पढ़े बलके सलाम फेरने के बाद मोबाइल में देख कर पढ़ सकते है।

इस्लाम में हर चीज़ के लिए आसानी दिया गया है इसी लिए किसी सख्स को दुआ याद नहीं तो उसे चाहिए की दुआ ए मशुरा के बाद सलाम फेर दे फिर ये दुआ पढ़े।

अल्लाहुम्मा इन्नी अस्ताखीरुका बी – इलमीका व असतक्दीरुका बी – क़ुदरतिका व अस अलुका मीन फ़ज़्लिका अल – अज़ीम फ – इन्नका तक़्दीरु वाला अक़्दीरु व ता – लामु वाला अ लामु व अंता अल्लामु – ल – घुयुब . अल्लाहुम्मा इन कुंता ता – लम अन्ना हाज़ा – ल अमरा खैरुन ली फि दिनी व – माँ अशी व – आक़िबति अमरि फ़क़दिरहु ली व यस्सीरहु सुम्मा बारीक ली फिहि व इन कुंता ता – लामु अन्ना हु शर – रुन फि दिनी व-माँ अशी व-आक़िबति अमरि अस्रीफहु अन्नी वास्-रिफ़नी अन्हु – वाक्दिर ली अल-खैरा हैसु का -न सुम्मा अररिज़ज़नी बिहि

NOTE: जब आप हाज़ल अम्र पर पहुंचे तो उस काम का जिक्र करे जिस काम के लिए इस्तिखारा कर रहे है फिर आगे की दुआ पढ़े।

इस्तिखारा का जवाब कैसे मिलता है

इस्तिखारा का जवाब ख्वाब की शक्ल में आ सकता है या जवाब दिल में किसी बात से आ सकता है या फिर हालात से भी जवाब मिल सकता है यानि खबर आ जाए की किसी चीज़ में नुकसान हो गया है या किसी चीज़ में बढ़ोतरी हो गया.

लेकिन इस्तिखारा हलाल चीज़ पर होना चाहिए हराम चीज़ पर नहीं यानि कोई सख्स शराब पिने का इस्तिखारा करे की पिए या ना पिए ये गलत है क्युकी अल्लाह ता’अला ने पहले की कुरान में हराम चीज़ करने से मना कर दिया है.

ये जरुरी नहीं है की इस्तिखारा का जवाब एक बार भी ही आए हो सकता है की एक बार इस्तिखारा करने पर आए तो दस बार करने से जवाब मिल जाए लेकिन आपको बार बार करना चाहिए.

Istikhara Namaz Related Questions (FAQs)

इस्तिखारा करने के बाद जवाब न मिले तो क्या करे?

जब किसी सख्स को इस्तिखारा नमाज़ पढने के बाद भी जवाब नहीं मिल रहा है तो समझ जाए की अल्लाह ता’अला ने जानबूझ कर आपके दिल में जवाब नहीं दिया.

इसका मतलब ये है की अल्लाह सुबान व ता’अला बहुत खुश है आपके मांगने के तरीके से आपको चाहिए की इसी तरह से बार बार दुआ मांगते रहे.

क्या मै दुसरे सख्स का इस्तिखारा कर सकता हूँ?

ये बहुत दुःख की बात है की आज के हमारे भाई इबादत भी दुसरे से करवा रहे है आपको ये सोचना चाहिए की नमाज़ हर एक मुस्लमान के लिए फ़र्ज़ है और ये नमाज़ उसी के लिए है.

इसी लिए इस्तिखारा भी न हम किसी दुसरे का कर सकते है और नहीं अपना इस्तिखारा दुसरे से करवा सकते है ये सब जायज़ नहीं है.

इस्तिखारा की दुआ को कितनी बार पढ़ना चाहिए?

रसूल सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने इसके मुताल्लिक कोई भी हदीस में नहीं बताया है ये तो आपके और अल्लाह के बीच का बात है ये आप पर निर्भर करता है जब तक फैसला का जवाब ना मिले तो इस दुआ को पढ़ते रहना चाहिए.

बिना नमाज़ के इस्तिखारा की दुआ मांग सकते है

हाँ जरुर, इस्तिखारा दुआ के लिए नमाज़ पढ़ना जरुरी नहीं है आप बिना नमाज़ पढ़े ये दुआ पढ़ सकते है.

शादी और निकाह के लिए इस्तिखारा कैसे करे

बहुत सारे लोगो को सोचना है की शादी विवाह के लिए इस्तिखारा अलग है लेकिन ये सही नहीं है क्युकी किसी भी हाजत के लिए एक ही इस्तिखारा करना चाहिए जिसका तरीका ऊपर बताया है.

Conclusion – Istikhara ki Namaz

दोस्तों आप कमेंट में बताये की आप सभी को Istikhara ki Namaz ka Tarika कैसा लगा जिसमे नियत और रकात की जानकारी सिखने को मिला.

इसी तरह इस्लामिक जानकारी के लिए Outline Islam को बुकमार्क कर ले जिससे इस्लाम से रिलेटेड कोई सवाल हो तो इस वेबसाइट से सीख सकते है.

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