Istikhara ki Dua in Hindi | इस्तिखारा की तरीका सीखे

अस्सलामु अलैकुम दोस्तों, जब किसी फैसले को लेकर कसमकस है तो आपको Istikhara ki Dua को सीखने और याद करने की जरुरत है. लेकिन Dua e Istikhara के बारे में पूरी जानकारी कोई भी ब्लॉग नहीं दे रहा है।

इसीलिए आज की पोस्ट में आप सभी को इस्तिखारा की दुआ को हिंदी और हिंदी में दिया गया है साथ में ही इसके मूल भाषा जो अरबिक है इसमें में भी लिखा गया है।

इसी तरह आपके दिल और दिमाग में यह भी सोच रहे होंगे की काश इस दुआ का मतलब भी मालूम चल जाए तो इस का भी हल इसी वेबसाइट में इस्तिखारा की तर्जुमा के द्वारा समझाया गया है।

इस्तिखारा की दुआ क्या है?

इस्तिखारा का मतलब है की अल्लाह ता’अला से अपने काम के लिए अच्छाई और रजामंदी तलब करना। यह काम यानि इस्तिखारा करना आपके जीवन में बहुत सारे बड़े बड़े काम में मदद कर सकता है।

जैसे की आपकी शादी होने वाली है तो आप इस्तिखारा करेंगे तो आपको मालूम चल सकता है की वह लड़का/लड़की हमारे लिए अच्छा है या बुरा। इसी तरह कोई कारोबार शुरू कर रहे है और इससे पहले अगर इस्तिखारा करते है तो इसमें अल्लाह की रजामंदी या मार्गदर्शन मिल जाएगा।

Istikhara ki Dua कब पढ़ी जाती है?

इस दुआ को पढ़ने और वजीफा करने लिए आपको कुछ समय के लिए शांति यानि सुकून की जरुरत पड़ेगी और इसको पढ़ने के लिए सबसे बेस्ट वक़्त ईशा की नमाज़ के या रात के आखिरी पहल जब इन्सान सभी कामो से फारिग हो गया हो।

क्युकी इस्तिखारा करने के लिए एक मुकम्मल तरीका है जो निचे बताया जाएगा जिसमे आप अल्लाह से बात करने वाले है तो आपको शांति वाली जगह की जरुरत पड़ेगी।

Istikhara ki Dua

नाज़रीन शादी या कारोबार इसमें फैसला लेना बहुत मुश्किल हो जाता है क्युकी जब शादी की बात की जाए तो लड़का हो लड़की यह सोचती है की जो रिश्ता हमारी लिए आया है वह मेरे लिए बेहतर है भी या नहीं इसमें यह इस्तिखारा मदद करेगा।

इसी तरह कारोबार या कोई कंपनी आपके लिए अच्छा रहेगा या नहीं इस वक़्त में भी यह दुआ एक अच्छा साबित हो सकता है जिसमे एक बेहतर आप्शन मिल सकता है।

आपको बता दे की यह दुआ सिर्फ शादी या कारोबार के लिए नहीं बलके कोई भी छोटी से बड़ी तक काम के लिए यह दुआ एक अच्छा आप्शन आप सभी के लिए रहेगा।

अब dua e istikhara सीखने के लिए आप सभी तैयार हो जाए और आप सभी से एक गुजारिश है की इस दुआ को अरबिक भाषा में ही याद करे और पढ़े।

लेकिन अरबिक में याद ना हो तो हिंदी या इंग्लिश में भी याद कर सकते है इसमें कोई बुराई नहीं है इसके लिए निचे अच्छी तरह से लिखा गया है।

istikhara ki dua in arabic

यह दुआ हम लोगो को कोशिश करना चाहिए की इसको अरबिक भाषा में भी पढ़े क्युकी अगर अरबिक के अलावा कोई और भाषा में पढ़ते है तो वहां पे उच्चारण सही से नहीं हो पता है।

Istikhara ki Dua in Arabic
istikhara ki dua image

istikhara ki dua in hindi

अल्लाहुम म इन्नी अस्तख़ी रू-क बि अिल्म-क व अस्तकि़्दरू-क बि कु़द्रति-क व अस्अलु-क मिन फ़ज़ि्ल-कल अजी़मि फ़ इन-न-क तकि्दरू व ला अकि़्दरू व तअ़लमु व ला अअ्लमु व अन-त अल्लामुल ग़ुयूबि अल्लाहुम-म इन कुन-त तअ्लमु अन-न हाज़ल अम-र खै़रूल्ली फी़ दीनी व मआशी व आक़िबति अम्री फ़क़ि्दरहु ली व यस्सिरहु ली सुम-म बारिक ली फ़ीहि व। 

इन कुन-त तअ्लमु अन-न हाज़ल अम-र शर्रूल-ली फ़ी दीनी व मआशी व आक़िबति अमरी फ़स् -रिफ़हु अन्नी वसि्रफ़्नी अन्हु वकि्दर लि-यल खै-र हैसु का-नर सुम अर्जिनी बिही।

इस्तखारा की दुआ का तर्जुमा

इस्तिख़ारा की दुआ का तर्जुमा हिन्दी में – ऐ अल्लाह, मैं तेरे इल्म के ज़रिए तुझ से भलाई मांगता हूं और तेरी कु़दरत के जरिए तुझसे कु़दरत तलब करता हूं और तेरे बड़े फज़ल का तुमसे सवाल करता हूं, क्योंकि बेशक तुझे कु़दरत है और मुझे कु़दरत नहीं है और तू जानता है, और मैं नहीं जानता और तू गैबों का खूब मानने वाला है। 

ऐ अल्लाह, अगर तेरे इल्म में मेरे लिए यह काम तेरी दुनिया और आख़िरत में बेहतर है, तू उसको मेरे लिए मुकद्दर फ़रमा, फिर मेरे लिए उसमें बरकत फ़रमा और अगर तेरे इल्म में मेरे लिए यह काम मेरी दुनिया व आख़िरत में बुरा है, तो उसको मुझ से और मुझको उससे दूर फ़रमा और मेरे लिए भलाई मुकद्दर फ़रमा, जहां कहीं भी हो फिर उस पर मुझे राज़ी फ़रमा।

istikhara ki dua in english

Allaahumma ‘innee ‘astakheeruka bi’ilmika, wa ‘astaqdiruka biqudratika, wa ‘as’aluka min fajhilikal-‘Adheemi, fa’innaka taqdiru wa laa ‘aqdiru, wa ta’lamu, wa laa ‘a’lamu, wa ‘Anta ‘Allaamul-Ghuyoob, Allaahumma ‘in kunta ta’lamu ‘anna haazal-‘amra Khayrun lee fee deenee wa ma’aashee wa ‘aaqibati ‘amree  Faqdurhu lee wa yassirhu lee summa baarik lee feehi,

wa ‘in kunta ta’lamu ‘anna haazal-‘amra sharrun lee fee deenee wa ma’aashee wa ‘aaqibati ‘amree, Fasrifhu ‘annee wasrifnee ‘anhu waqdur liyal-khayra haythu kaana thumma ‘ardhinee bihi.

जिसे इस्तिखारा की दुआ याद न हो उसे क्या करना चाहिए?

अगर किसी शख्स को इस्तिखारा की दुआ याद ना और उसके सामने कोई जल्दी वाली काम बन आ जाए और उसको अरबी पढ़ने में भी परेशानी हो तो ऐसी सूरत में एक ही उपाय है की इस दुआ का अर्थ हिंदी या उर्दू विनम्रता के साथ और दिल की उपस्थिति से इंशाल्लाह इससे जरुर लाभ मिलेगा।

लेकिन जिसको अरबिक या हिंदी या इंग्लिश पढ़ने आता है तो उसको चाहिए देख कर भी यह दुआ पढ़ कर इस्तिखारा कर सकते है और यह भी एक अच्छा तरीका है।

इस्तिखारा करने का तरीका

नाज़रीन आप सभी को पहले ही बताया हूँ की इस्तिखारा करने के लिए सबसे अच्छा समय ईशा की नमाज़ के बाद यानि अगर आप नमाज़ नहीं पढ़ते है तो आखिरी पहल में यह तरीका आजमाय क्युकी इस वक़्त शांति रहती है।

जिसमे सबसे पहले अच्छी तरह से वजू करे फिर पहले दो रकअत नमाज़ नफल अदा करें जैसे कि अन्य नफल नमाज़ पढ़ी जाती है।

दो रक्अत नफ़्ल नमाज़ पढ़ने में पहले रक्अत में सूरह अल-काफिरून और दूसरे रक्अत में सूरह-अल-इखलास पढ़ें। जब सलाम फेर दे फिर इसके बाद इस दुआ यानि (इस्तिखारा की दुआ) पढ़े।

Shadi ke liye Istikhara ki Dua

Istikhara ki dua for marriage: कुछ लोग ये समझते हैं कि Istikhara ki Dua सिर्फ शादी के लिए किया जाता है लेकिन ये कहना ग़लत है जब भी ज़िंदगी में कोई नेक काम का इरादा करे जैसे कोई बिजनेस शुरू करने से पहले,या कोई प्रोपर्टी खरीदने से पहले या शादी के लिए रिश्ता तय करने से पहले भी पढ़ सकते है।

एक और बात शादी के लिए इस्तिखारा का तरीका अलग नहीं है बलके इस्तिखारा का तरीका एक ही है चाहे शादी के लिए हो या नया कारोबार शुरू करने के लिए हो।

इस्तिखारा का जवाब कैसे मिलता है?

दोस्तों अब एक अहम् सवाल है की आखिर हम इस्तिखारा कर लिए लेकिन हमें कैसे मालूम चलेगा की जवाब क्या है? इसका कोई भी सीधा जवाब नहीं है क्युकी इस्तिखारा एक दुआ जैसे खाने की दुआ या कब्र पर मिटटी देने की दुआ बाकि सारी दुआए होती है।

एक ये भी ध्यान रखिएगा की इस्तिखारा से आपकी तक़दीर बदल नहीं जाएगी बलके जो काम आप करने जा रहे है उसकी रजामंदी या अल्लाह के सामने छोटे होने की इज़हार कर रहे है।

इस्तिखारा एक तरह का अमल है के अल्लाह आगे क्या होने वाला है मै नहीं जनता हूँ। तेरी एक जात है जो सब कुछ जानती है की आगे क्या होने वाला है और उसी खैर देने वाला है और इस मसले में मेरे लिए खैर कर दे जो मै आगे करने वाला हूँ।

उसके बाद आप कर गुजरिये वह काम जो करने वाले है या किस काम को दिल व दिमाग में रख कर इस्तिखारा किये थे।

क्या इस्तिखारा करना जायज है?

जी बिलकुल इस्तिखारा करना जायज़ इसके बारे में आप किसी भी उलमा या किसी भी फिरका के उलमा या मुफ़्ती से पूछ सकते है. आपको और ज्यादा यकीन के लिए एक हदीस बता रहा हूँ।

हजरत जाबिर रज़ियल्लाहु अनहु फरमाते हैं कि “अल्लाह के रसूल सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम हमको इस्तिख़ारा इस तरह सिखाते थे। जैसे कुरान शरीफ की आयत सिखाते थे। वह कहते थे कि जब भी तुम कोई नया काम करो तो दो रक्अत नफ़्ल नमाज़ के बाद इस्तिख़ारे की दुआ पढ़ो।”

क्या इस्तिखारा दूसरे से कराना जायज है?

हमारे नबी सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने कभी भी किसी को यह नहीं बोले की अपना इस्तिखारा दुसरे लोगो से भी करा सकते है। इसलिए आपको भी चाहिए की अपना इस्तिखारा खुद करे और दुसरे से ना कराए।

इस्तिखारा कितनी बार करना चाहिए?

इस्तिखारा कितनी बार करना चाहिए यह कोई भी हदीस में लिखा नहीं है। इसलिए जब तक आपके सवालो का जवाब या मुतमईन नहीं हो जाते तो इस्तिखारा करते रहे।

क्या इस्तिखारा की दुआ अरबी में पढ़ना जरुरी है?

अब कोई शख्स नया नया मुसलमान हुआ हो या मुस्लिम घर में पैदा होने बावजुद अरबिक नहीं सीख पाया तो इस कंडीशन में आप अरबिक के अलावा अपने मदर भाषा में पढ़ सकते है।

अरबिक भाषा में यह Istikhara ki Dua इसलिए पढ़ा जाता है की इसका उचारण सही दंग से होता है।

क्या मै यह दुआ बिना दो रकात नमाज़ के पढ़ सकता हूँ?

हाँ बिलकुल, आप बिना दो रकात नफिल नमाज़ के इस्तिखारा कर सकते है क्युकी यह दोनों काम नफिल ही है। जिसका मतलब होता है करने से सवाब और ना करने से कोई भी गुनाह नहीं।

आज क्या सीखा आपने?

दोस्तों आप किसी भी कारण से कोई काम में फसे हुए है और परेशान है तो परेशान होने की जरुरत नहीं है बलके Istikhara ki Dua और इसकी नमाज़ पढ़ने की जरुरत है जिससे आपको अल्लाह ता’अला की रजामंदी मालूम चल जाएगा।

इस दुआ को सिखाने के लिए अरबिक हिंदी और इंग्लिश में लिखा गया है जिससे कोई भी शख्स जिसको सिर्फ हिंदी पढ़ने आता होगा वह इस्तिखारा कर सकता है।

यह आउटलाइन इस्लाम वेबसाइट आप की खिदमत में इस्लामिक दुआ और जानकारी समय समय पर पब्लिश करता रहता है और ऐसी ही जानकारी आपको भी सीखना है तो पहले इस पोस्ट को अपने दोस्तों को शेयर करे।

फिर इस वेबसाइट को बुकमार्क कर ले जिससे यह होगा की जब भी इस वेबसाइट में कोई भी पोस्ट पब्लिश होगा आपके मोबाइल में नोतिफ़िकेसन आ जायेगा।

नाज़रीन इस पोस्ट में बस इतना ही, अगर यह इस्लामिक जानकारी अच्छा लगा होगा तो निचे कमेंट में “माशाल्लाह” जरुर लिखे।

अगर आपके पास पांच या दस मिनट का समय है तो इसे भी पढ़ सकते है:

Comments

No comments yet. Why don’t you start the discussion?

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *