Allah ka Zikr Karne ka Tarika | अल्लाह का ज़िक्र कैसे करे?

allah ka zikr kaise kare

जन्नत पाने के लिए बस एक ही तरीका है जो Allah ka Zikr करना और जो कुरान व हदीस में अल्लाह ता’अला बताया है उसको मानना लेकिन बहुत सारे लोगो को Allah ka zikr karne ka Tarika ही मालूम नहीं है।

इसीलिए आज की पोस्ट में अल्लाह के ज़िक्र करने का तरीका और इसके अहमियत व फ़ज़ीलत कुरान व हदीस में बहुत ज्यादा आई है जिसके बारे में यहाँ पर सिखने को मिलने वाला है।

दोस्तों आज सारी दुनिया में एक बेचैनी पाई जा रही है कोई देश कोई शहर और कोई सिटी यहाँ तक हर एक शख्स को बेचैनी है लेकिन अफ़सोस हम लोग मुस्लमान होते हुए भी गैर-मुस्लमान वाली चीज़े करने लगते है जिससे की सुकून मिले लेकिन उससे भी नहीं मिलता यहाँ तक के लोग मैडिटेशन करने लगते है सुकून पाने के लिए लेकिन कुछ हद तक सुकून मिल जाता है फिर कुछ वक़्त बीतने के बाद फिर शुरू हो जाता है।

लेकिन आपको बता दे की जो सुकून अल्लाह ता’अला की ज़िक्र करने में आता है वह दुनिया के किसी भी काम में नहीं आता इसीलिए प्यारे दोस्तों Allah ka Zikr karne ka Tarika सीखो।

Allah ka Zikr Kya Hai?

अल्लाह ता’अला का ज़िक्र करने से मुराद मतलब यह है की अल्लाह को याद करना या अल्लाह को पुकारना। इन्सान हो या जिन फिर कोई भी सैय को सब के सब अल्लाह के मोहताज है और अल्लाह ने हमें सिर्फ उसकी इबादत और तारीफ बयान करने के लिए ही पैदा किया है।

Allah ka Zikr Kaise Kare?

नाज़रीन अब ये सवाल होता है की अल्लाह का ज़िक्र कैसे करे? तो अल्लाह ता’अला का ज़िक्र उसी तरीके से करे जैसा की अल्लाह और उसके रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने हमें हुक्म दिया है।

मगर आज का दौर दज्जले फितना का दौर है जिसमे कुछ लोग Allah ka Zikr करने के लिए वैसे तरीके खुद से एजाद करते है जो कुरान व हदीस में आया ही नहीं है या सहाबा कराम ने भी नहीं किया है।

इसीलिए इबने माजा 14 कहा गया है की “जिसने दीने इस्लाम में कोई एसी चीज़ निकाली जो दीन में नहीं है तो वो चीज़ मरदूद है यानि बिदत है“।

अल्लाह सुबान व ता’अला कुरान में फरमाते है की “तो मुझे याद करो मै तुम्हारा चर्चा करूँगा” अल्लाह अपने जाकिर बन्दों को किस तरह याद करता है इस की तफसील कुछ हदीस से मालूम होती है जो निचे बताया गया है।

हजरत अबू हुरैरा अल्लाह ता’अला अनहो से  मारवी  है कि नबी सल्लल्लाहु अलेही वसल्लम ने फरमाया अल्लाह तबारक व ता’अला इरशाद फरमाते है “मेरे मुतालिक मेरा बंदा जो गुमान रखता है मैं उसके लिए ऐसा ही होता हूं और मैं उसके साथ होता हूं जब वह मुझे याद करता है. अगर वह मुझे दिल में याद करता है तो मैं उसको अपने दिल मैं याद करता हूं। अगर वह मुझे किसी जमात में याद करें तो मैं उसे ऐसी जमात में याद करता हूं फरिश्तों की जमात सुभान अल्लाह जिस खुशनसीब को याद करें और वह भी बेहतर जमात यानी फरिश्तों के ग्रुप में यकीनन उसके लिए दुनिया आखिर दोनों ही संवर जाएंगे।”

Allah ka Zikr Karne ka Tarika

दोस्तों अगर आप दिल की सुकून और आखिरत की आफियत चाहते है तो Allah ka Zikr आज से ही करना शुरू कर दे क्युकी अल्लाह का ज़िक्र व अज्कार करने से सैतान से हिफाजत होती है और हमारे नफस को पाकीजगी होती है।

तो चलिए सीखते है की वह कोई सा ज़िक्र व अज्कार है जिनसे हम दुनिया और आखिरत दोनों में फायदा हासिल कर सकते है। अल्लाह के जिक्र यानि Allah Ke Zikr Ka Tarika तिन तरह से कर सकते है जो नमाज़, कुरान और ज़िक्र व अज्कार पढ़ने से होता है।

नमाज़ सबसे पहला उपाय है जिससे अल्लाह का ज़िक्र व अज्कार कर सकते है जो हर मुस्लमान मर्द व औरत पर पांच वक़्त की नमाज़ फ़र्ज़ किया गया है। जिसमे हम अल्लाह को याद व तारीफ किया करते है और दुआ भी मांगते है।

इसी तरह से कुरान पढ़ना भी अल्लाह का जिक्र करना होता है। कुछ उलमा कहते है की अगर आप अल्लाह की बाते सुनना चाहते है तो कुरान की तिलावत कर लिया करे।

कुरान मजीद मे अल्लाह तआला ने बहुत जगह पर अपनी इबादत का जिक्र किया है अल्लाह तआला खुद फरमाते है कि “मैंने जिन्नों और इंसानों को अपनी इबादत के सिवा किसी काम के लिए पैदा नहीं किया”।

नमाज़ और कुरान के अलावा बहुत सारे तरीके है जिनसे Allah ka Zikr आसानी से कर सकते है यानि चलते फिरते, सोते रोजाना कर सकते जिसको यहाँ पर बताया जा रहा है।

रोजाना अल्लाह का ज़िक्र करने वाली 7 चीज़े:

अस्ताग़फिरुल्लाह:- हज़रत इब्ने अब्बास (रज़ी०) रिवायत करते हैं कि रसूल अल्लाह (s.a.w) ने इरशाद फ़रमाया की “जो शख्स पाबंदी से इस्ताग्फार करता रहता है तो अल्लाह तआला उसके लिए हर तंगी से निकलने का रास्ता बना देते हैं, हर गम से उसे नजात अता फरमाते हैं और उसे एसी जगह से रोज़ी अता फरमाते हैं जहाँ से उसको गुमान भी नही होता।”

सुब-हान-अल्लाहहि व बिहमदिही:- हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र (रज़ी०) रिवायत करते हैं कि नबी (s.a.w) ने इरशाद फ़रमाया है की “जो शख्स सुब-हान-अल्लाहहि व बिहमदिही पढ़ता है उसके लिए जन्नत में एक खजूर का दरख़्त लगा दिया जाता है।”

सुबहान अल्लाह,अल-हमदु लिल्लाह, ला  इला-ह इल्ल ल्लाह और अल्लाह हुअकबर:- हज़रत नोमान बिन बशीर (रज़ी०) रिवायत करते हैं कि रसूल अल्लाह (स०अ०) ने इरशाद फ़रमाया की “जिन चीजों से तुम अल्लाह तआला की बड़ाई ब्यान करते हो उनमे से सुब हान अल्लाह ,अल-हमदु लिल्लाह और अल्लाह हु अकबर हैं” मुस्लिम की हदीस में है के100 बार सुबहानअल्लाह पढने से एक हज़ार नेकियाँ लिख दी जायेंगी और उसके एक हज़ार गुनाह माफ़ कर दिए जायेंगे।

सुबहा-नल्लाहि व बिहुम्दिही सुबहानल्लाहि अज़ीम:- हज़रत अबू हुरैरह (रज़ी०) फरमाते हैं कि नबी सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने इस्र्शाद फ़रमाया “दो कलिमे एसे हैं जो अल्लाह तआला को बहुत महबूब है जो जबान पर बहुत हलके और तराजू में बहुत वजनी है वह कालीमात सुबहा-नल्लाहि व बिहुम्दिही सुबहानल्लाहि अज़ीम हैं।”

दरूद शरीफ पढ़ना:- जो शख्स एक  बार नबी करीम (s.a.w) पे  दुरूद भेजता है अल्लाह तआला उस पर 10 नेकी लिखी जाती हैं और 10 गुनाह माफ़ कर देते हैं और 10 दरजात बलंद फरमाते हैं।

सुरह इखलास कसरत से पढ़ना:- 3 बार सुरह इखलास (कुल हु अल्लाह हु अहद) को पढ़ने से पुरे एक कुरआन मजीद पढने का सवाब मिलता है।

अयातुल कुर्सी पढ़ना:- हज़रत अबू उमामा (रज़ी०) से रिवायत है कि रसूल अल्लाह (s.a.w) ने इरशाद फ़रमाया “जो शख्स हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद अयतुल कुर्सी पढ़ लिया करे,उसको जन्नत में जाने से सिर्फ उसकी मौत ही रोके हुए है।” रात को सोने से पहले अयातुल कुर्सी पढने वालों के लिए अल्लाह तआला पूरी रात एक फ़रिश्ते तो उसकी हिफाज़त के लिए भेजते हैं।

यहाँ पर जितने भी Allah ka Zikr karne ka Tarika बताया गया है सिर्फ इतना ही नहीं है बलके Salam karne ka Sunnat Tarika से लेकर Khana Khane ka Sunnat Tarika तक हजारो तरीके से जिनसे ज़िक्र व अज्कार करने का सवाब पा सकते है।

Allah ka Zikr ki Fazilat

“जो लोग ईमान लाए उनके दिल अल्लाह के ज़िक्र से इतमिनान (सुकून) हासिल करते है याद रखो अल्लाह के ज़िक्र से ही दिलों को इतमिनान मिलता हैं।” (सूरह राद 28)

Allah ka Zikr ki Fazilat यह है की अल्लाह तआला अपने बंदे को कामयाब कर देता है “ए ईमान वालों जब किसी फोज से तुम्हारा मुक़ाबला हो तो साबित क़दम रहा करो और अल्लाह को कसरत से याद किया करो ताकि तुम फ़लाह पा जाओ।”

“ए ईमान वालों अल्लाह तआला का ज़िक्र बोहत ज़्यादा किया करो।” (सूरा अहज़ाब)

“उठते बैठते और लेटे अल्लाह तआला का ज़िक्र करते रहो।” (सूरा निसा 103)

आज क्या सीखा

दोस्तों आज का यह Allah ka Zikr वाला पैगाम कैसा लगा जिसमे सिखने को मिलेगा की अल्लाह का ज़िक्र तिन तरीके से किया जा सकता है और ज़िक्र व अज्कार करना क्यों जरुरी है।

आज के ज़माने में लोग सुकून पाने के लिए पब बीच या कही घुमने चले जाते है लेकिन उनको तब भी सुकून नहीं मिलता है क्युकी सुकून पाने के लिए अल्लाह का ज़िक्र करना होगा।

अगर इस पोस्ट में कही भी किसी किस्म की गलती या कुछ और इनफार्मेशन होना चाहिए जिससे आगे आने वाले लोगो को मदद करेगा तो निचे कमेंट करके जरुर बताये।

इसी तरह का जानकारी पाना चाहते है जिससे अल्लाह सुबान व ता’अला के और ज्यादा करीब हो सके तो इस पैगाम को सोशल मीडिया में अपने दोस्तों को शेयर करे।

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